किस तरह ध्यान लगाने में मददगार है सिद्धासन

किस तरह ध्यान लगाने में मददगार है सिद्धासन

हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं, जिनके नाम क्रमशः मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार हैं। इन सभी चक्रों के अलग-अलग काम होते हैं। जैसे किसी जीवित प्राणी में ऊर्जा ऊपर की दिशा में मूलाधार चक्र से सहस्रार चक्र की ओर प्रवाहित होती है। लेकिन अनियमित, असंयमित व अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण सहस्रार चक्र की ओर प्रवाहित होने वाली ऊर्जा बाधित हो जाती है।

जिसके कारण शरीर के विभिन्न अंगों में ऊर्जा के संचार में रुकावट पैदा हो जाती है। इस कारण से शारीरिक बनावट और व्यवहार में भी बदलाव आने लगता है, जो जीवन में समस्याएं पैदा करता है और नित नई व अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि सिद्धासन इन चक्रों को जगाने और उन्हें ठीक से काम करने में ध्यान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सिद्धासन में अच्छा लगता है ध्यान :

दरअसल ध्यान लगाने से ऊर्जा के प्रवाह पर बढ़ रहे अवरोध व नियंत्रण को स्थिर करने, विचार प्रक्रिया में अनुकूलन, ऊर्जा में आने वाले अवरोध को दूर करने और चक्रों को संतुलित बनाए रखने में सहायता मिलती है। किंतु ध्यान लगाना भी एक कला है, जिस पर कड़ी मेहनत और समय के साथ महारथ प्राप्त होती है। कई आसनों की मदद से भी ध्यान लगाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। ऐसा ही एक आसन है 'सिद्धासन'। सिद्धासन ठीक प्रकार से ध्यान लगाने में सहायता करता है। नियमित ध्यान लगाना ऊपरी दिशा में ऊर्जा प्रवाह को सुगम बनाता है और चक्र संतुलन में रहते हैं।

सिद्धासन कैसे करें :

- सिद्धासन करने के लिये सबसे पहले पैर आगे की ओर करें और बैठ जाएं।

- अब धीरे-धारे अपने दायें पैर को मोड़ें और एड़ी को नितम्ब संधि (हिप ज्वाइंट) के पास लाएं।

- फिर बायां पैर मोड़ें, पंजों को दाएं पैर की पिंडली और जांघों के बीच रखें। इसके साथ ही एड़ी को दाएं पैर की एड़ी पर रखें।

- अगर आपको अपने बायें पैर को इस तरह रखने में समस्या होती है, तो इसे केवल सीधे पैर के टखने के सामने रख लें।

- आप चाहें तो पैरों का क्रम बदल भी सकते हैं। अब हाथों को दोनो घुटनों के ऊपर ज्ञानमुद्रा में रखें।

- सांस सामान्य रखें और आज्ञाचक्र में ध्यान केन्द्रित करें।

पढ़ाई कर रहे बच्चों के लिए यह आसन बेहद लाभकारी होता है। क्योंकि इससे जठराग्नि तेज होती है, दिमाग स्थिर बनता है, एकाग्रता बढ़ती है, और स्मरणशक्ति बढ़ती है और पाचनक्रिया नियमित होती है। कुण्डलिनी शक्ति जागृत करने वाला ये आसन श्वास संबंधी रोगों, हृदय रोगों, अजीर्ण, दमा आदि अनेक रोगों को दूर करने में सहायक है।


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