शक्ति का भंडार है गाजर

शक्ति का भंडार है गाजर

हर मनुष्य गाजर से परिचित है तथा इसका सेवन करता है। भारत में गाजर तीन रंगों में पाई जाती हैं काली, लाल व पीली। काली गाजर अधिक गुणकारी होती है। लाल गाजर में भी पर्याप्त गुण होते हैं, किन्तु पीली गाजर में अधिक गुण नहीं पाए जाते और न ही यह खाने में स्वादिष्ट होती है। वैसे सब रोगों की दवा है गाजर। इसे चाहे कच्चा खाया जाए या पकाकर अथवा उबालकर, इससे मिलने वाले लाभ में कमी नहीं होती। गाजर के लगातार सेवन करने से कब्ज जैसी भयंकर बीमारी भी दूर हो जाती है।

गरीब लोगों के लिए गाजर दूध और सेब का काम करती है। जो लोग महंगा दूध और सेब नहीं खरीद सकते, उनको गाजर का सेवन करना चाहिए। यह शरीर में रक्त की कमी दूर करती है। गाजर का रस नित्य सेवन करने से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है और शरीर स्वस्थ एवं बलवान बनता है।

आयुर्वेद की दृष्टि से गाजर को स्वाद में मधुर, पाचक, दीपन, तीक्ष्ण, स्निग्ध, तिक्त, उष्णवीर्य, स्नेहक, रक्तशोधक, ग्राही, वातकफ पित्तनाशक, गर्भाशय रोगनाशक, मस्तिष्क तथा नाडि़यों को बल देना वाला और नेत्र ज्योति बढ़ाने वाला माना गया है।

गाजर के कुछ प्रमुख औषधीय गुण इस प्रकार हैं :

कब्ज : एक कप गाजर का रस लें। उसमें एक नींबू निचोड़ लें। इस मिश्रण को आधा घंटा धूप में रखा रहने दें। इसके बाद इसे धीरे-धीरे पीएं। कब्ज दूर हो जाएगी।

पेट के कीड़े : गाजर को कद्दूकस कर लें। इसे पानी में उबालकर गुड़ मिलाकर पीने से पेट के कीडे मर जाते हैं।

पथरी की बीमारी : गाजर का हलवा प्रतिदिन पचास ग्राम नियमित रूप से दो सप्ताह खाएं।

पीलिया : गाजर का ताजा रस दो सौ ग्राम गर्म करके सुबह-शाम दो-तीन सप्ताह तक पीएं। भोजन हल्का खाएं।

खूनी बवासीर : गाजर का रस सौ ग्राम, बकरी के दूध का दही पचास ग्राम तथा दो चम्मच चीनी, इन सबको मिलाकर भोजन के बाद सुबह-शाम लें। एक सप्ताह में ही लाभ शुरू हो जाता है।

आधे सिर का दर्द : गाजर को उबालकर छील लें और कुचलकर गाजर का हलवा बना लें। इस हलवे को शहद के साथ सुबह-शाम खाने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है।

दिमागी कमजोरी : गाजर को कसकर दो चुटकी सेंधा नमक मिलाकर खाने से मस्तिष्क के सारे द्वार खुल जाते हैं।

नींद न आना : मीठी गाजरें छीलकर सेंधा नमक लगाकर सुबह -सुबह कच्ची खाएं।

सिर के बाल झड़ना : दो सौ ग्राम गाजर दही में रायता बनाकर खाएं। गाजर को कसने के बाद उसमें दही मिलाएं तथा थोड़ा सा जीरा और गरम मसाले भी मिला लें। यह रायता बालों की जड़ों में रक्त का संचार बढ़ाता है और बालों की जड़ें मजबूत करता है।

कम दिखाई देना : एक कप गाजर के रस में एक कप पालक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीएं। लगातार बीस दिन पीने से ही आंखों की रोशनी बढ़नी शुरू हो जाएगी।

उच्च रक्तचाप : सौ ग्राम गाजर का जूस पीएं। इसमें नमक न डालें। जूस में तुलसी के पत्ते डाल लें।

निम्न रक्तचाप : सौ ग्राम गाजर के रस में दो चममच शहद मिलाकर पीएं।

मर्दाना कमजोरी : छिली हुई गाजरें दो सौ ग्राम, दो पत्तियां लहसुन, आठ लौंग पीसकर नित्य पन्द्रह दिन तक खाएं। रात को सोने से पहले एक गिलास दूध पीएं।

कैंसर : गाजर का रस दो सौ ग्राम, पालक का रस सौ ग्राम, दोनों मिलाकर बिना नमक के पीएं, बहुत लाभ मिलता है। कैंसर के रोग का संबंध लीवर से है। साथ-साथ बड़ी आंतों में पुराना जमा हुआ मल भी इस रोग का मूल कारण है। शरीर शोधन के सभी मार्ग खोलने से बहुत लाभ मिलता है। शरीर का मल निष्कासन ही इस रोग का समाधान है। गहरी श्वांस लेना, चुकन्दर, तुलसी के पत्ते, बिना पका भोजन करना बहुत उपयोगी है।

यह सत्य ही है कि प्रकृति जिस रोग को ठीक नहीं कर सकती, उसे अन्य कोई भी ठीक नहीं कर सकता।


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