गुणों से भरपूर हरा-भरा धानिया

गुणों से भरपूर हरा-भरा धानिया

सब्जी या दाल में छौंक लगाने के बाद बुरका गया धनिया न केवल स्वाद और सुगंध को बढ़ाता है बल्कि धनिया अपने औषधीय गुणों के कारण भी एक फायदेमंद पौधा है। इसके हरे पत्तों में सेहत के कई सारे राज छुपे हैं। आंखों की रोशनी सलामत रखने के साथ ही यह त्वचा और दिल के रोगों तक से आपकी रक्षा करने का काम बखूबी अपने औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं। यह कहा भी जाता है कि हमारी परंपरागत रसोई में कई रोगों की दवाएं मौजूद होती हैं। इन्हें ही दादी-नानी के खजाने का भी नाम दिया जाता है। धनिया उनमें से ही एक है। विशेष तौर पर धनिये का प्रयोग अनिद्रा, फ्लू तथा कब्ज जैसे रोगों को दूर करने में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में भी सहायक होता है जिससे दिल की बीमारियों में राहत मिल सकती है, साथ ही आंखों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धनिये में भरपूर मात्र में एंटीऑक्सीडेंट्स लौह तत्व, विटामिन ए, एसेंशियल ऑइल्स आदि भी होते हैं। यह सभी मिलकर आंखों पर उम्र के साथ पड़ने वाले असर को कम करते हैं तथा मांसपेशियों के क्षरण को भी रोकते हैं, साथ ही आंखों पर उम्र के साथ पड़ने वाले तनाव के असर को भी कम करते हैं और कंजक्टिवाइटिस जैसे रोगों से भी नेत्रें की सुरक्षा करते हैं।

धनिये में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने का गुण भी होता है अतः यह डायबिटीज के लोगों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इतना ही नहीं, धनिये में छुपे एंटीसैप्टिक, एंटीफंगल तथा डिसइनफेक्टेंट गुण त्वचा के रोगों से भी रक्षा करते हैं। स्त्री रोगों के लिए भी यह एक अच्छी औषधि साबित होती है।

यह आर्थराइटिस, स्मॉल पॉक्स, एनीमिया जैसी तकलीफों में भी कारगर औषधि के रूप में काम करता है। हरा धनिया पत्ती के अलावा धनिये के सूखे बीजों का भी मसालों के रूप में एक पोषक तत्व के तौर पर काम करता है, इसीलिए सब्जी हो या दाल, चटनी हो या उपमा, धनिये का प्रयोग करना मत भूलिए। सेहत के लिए यह हरा-भरा फायदे का सौदा है।


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