कई रोगों की गुणकारी औषधि है अनानास

कई रोगों की गुणकारी औषधि है अनानास

अनानास एक फल होने के साथ-साथ कई रोगों के निवारण में गुणकारी औषधि भी है। अनानास के औषधीय गुण, प्रयोग तथा स्वास्थ्य लाभ को जाने इस लेख से :

अनानास एक स्वादिष्ट फल है। यह देश के दक्षिणी एवं पूर्वी प्रांतों में बहुतायत में पाया जाता है। अनानास के पत्ते केवड़े के समान होते हैं। पौधे के बीज में से बालियां निकलती हैं जिस पर फल उत्पन्न होते हैं। फल पर कटे हुए आकार के कठोर छिलके होते हैं। फल का रंग कुछ पीला या लालिमा लिए होता है। इसकी जड़ ग्वारपाठा की जड़ के समान होती है। अनानास का कच्चा फल खट्टा और पका फल खट्टा-मीठा होता है। यह स्वादिष्ट, मधुर, शीतवीर्य, शीतल और कुछ खट्टा होता है। इसे बलकारक, रुचिकारक, वायुनाशक, कफ- पित्तकारक, धातुदोष दूर करने वाला और गर्भनाशक कहा गया है। यह प्रदर और नेत्र रोगों को दूर करने के अलावा शरीर को पुष्ट बनाने में कारगर है। अनानास शरीर की सूजन, बहुमूत्र, टॉन्सिल, फोड़े-फुंसियां, हिचकी आदि में भी लाभदायक है। इसके औषधीय प्रयोग इस प्रकार हैं :

- अनानास के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पिसी हुई काली मिर्च छिड़ककर खाने से अम्लपित्त का प्रयोग शांत हो जाता है।

- शरीर में सूजन आ जाने पर अनानास का फल प्रतिदिन खाएं। आठ-दस दिनों में ही सूजन दूर हो जाएगी।

- प्रतिदिन अनानास के कुछ ताजे टुकड़े खाने से दो सप्ताह के भीतर ही हृदय की दुर्बलता से छुटकारा मिल जाता है।

- अनानास के महीन पिसे गूदे को बवासीर के मस्सों पर बांध लें। दो दिन में ही बवासीर रोग का नाश हो जाएगा।

- प्रतिदिन एक गिलास अनानास का ताजा ठंडा रस पीएं। घबराहट दूर होगी, शरीर पुष्ट बनेगा, गर्मी एवं प्यास कम हो जाएगी तथा हृदय और मस्तिष्क को शक्ति प्राप्त होगी।

- रोहिणी रोग से मुक्ति पाने के लिए अनानास के रस का सेवन करें। यह रोहिणी की झिल्ली काटकर गला साफ कर देता है।

- अनानास के गूदे को पीसकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से वे कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं।

- टॉन्सिल तथा गले की सूजन आदि दूर करने के लिए अनानास का सेवन करें। शीघ्र ही रोग दूर हो जाएंगे।

- अनानास को छीलकर उसके टुकड़े कर लें, फिर उन पर पिसी काली मिर्च तथा सेंधा नमक छिड़ककर खाने से कब्ज तथा अजीर्ण दूर होता है।

- लू लगने पर अनानास का ताजा गूदा खाने से बहुत लाभ होता है। इससे शरीर की सारी गर्मी निकल जाती है।

- अजवायन, बायबिडंग और छुहारा तीनों को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 5-6 ग्राम चूर्ण में आवश्यकतानुसार शहद मिलाकर अनानास के रस के साथ दिन में दो बार दें। 2-3 दिनों में ही उदर कृमि नष्ट हो जाएंगे।

- प्रतिदिन पका और ताजा अनानास खाने से मंदाग्नि रोग दूर होता है। यह शारीरिक दुर्बलता और यकृत वृद्धि में भी लाभदायक है।

- अनानास के रस में जीरा, पीपल, जायफल तथा काला नमक का समभाग चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से कुछ ही दिनों में अधिक पेशाब आने की शिकायत दूर हो जाती है।

- अनानास के कोमल व ताजे पत्तों का रस निकाल छानकर पीएं। आंतों के कीड़े मर जाएंगे।

- अनानास के पके फल का रस निकालकर उसमें थोड़ा पानी मिलाकर पीएं। ज्वर से उत्पन्न हुई पेट की जलन शांत हो जाएगी।

- अनानास के फल के रस में मिश्री मिलाकर पीने से मूत्र वृद्धि होती है और चित्त प्रसन्न हो जाता है।

- अनानास के पत्तों का रस स्त्री को पिलाएं। रुका हुआ मासिक धर्म फिर से शुरू हो जाएगा।

- अनानास के एक भाग रस में दो भाग बूरा मिलाकर सेवन करने से पित्तोन्माद से छुटकारा मिल जाता है।

- अनानास के पत्तों के सफेद भाग के ताजे रस में मिश्री मिलाकर पिलाने से कृमि रोग मिटता है और शौच साफ आता है।


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