गिलोय के फायदे और नुकसान

गिलोय के फायदे और नुकसान

गिलोय आयुर्वेद में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में से एक है। इसे अक्सर अमृता कहा जाता है। इसे अपनी जीवनशैली का अंग बनाकर आप बहुत सारी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं क्योंकि इसके सेवन से बहुत सी बीमारियां दूर हो जाती हैं। ऐसे में आप भी जानना चाहते होंगे कि गिलोय किस तरह हमारे स्वास्थ्य को फायदा पहुँचाती है और साथ ही इससे होने वाले कुछ नुकसानों के बारे में जानना भी ज़रूरी है। तो चलिए, आज जानते हैं गिलोय के फायदों और चंद नुकसानों के बारे में :-

ब्रेन टॉनिक के रूप में असरकारक –

ब्रेन टॉनिक के रूप में प्रभावी रहने वाला गिलोय दिमाग से सभी विषैले पदार्थों को साफ कर देता है। साथ ही मानसिक तनाव और चिंता जैसी समस्याओं को भी कम करता है। इसके अलावा गिलोय मेमोरी को तेज़ बनाने और काम पर ध्यान केंद्रित करने जैसी क्षमताएं भी विकसित करता है।

इम्यूनिटी बढ़ाये –

अक्सर बीमार रहने का कारण कमज़ोर इम्यूनिटी होती है लेकिन गिलोय का सेवन करने से रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ने लगती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स रोगों से शरीर की रक्षा करते हैं। गिलोय फ्री-रेडिकल्स को शरीर से बाहर निकालने के अलावा किडनी और लीवर से विषैले पदार्थों को भी बाहर करता है, साथ ही मूत्र मार्ग के इन्फेक्शन से बचाव भी करता है और इस तरह गिलोय के जूस का नियमित सेवन इम्यूनिटी को बढ़ाकर निरोगी शरीर पाने में सहायक होता है।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाये –

गिलोय का सेवन करके पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाया जा सकता है क्योंकि ये अपच को रोकता है। कब्ज से राहत पाने के लिए इसका सेवन गुड़ के साथ करना चाहिए। बवासीर की समस्या से छुटकारा पाने के लिए गिलोय को छाछ के साथ लिया जाना चाहिए। सुबह खाली पेट गिलोय का रस पीने से पेट के कीड़ों की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।

डेंगू, मलेरिया से बचाव करे –

गिलोय का सेवन करके खून में प्लेटलेट्स की कम हो चुकी संख्या को फिर से बढ़ाया जा सकता है। गिलोय के साथ तुलसी के पत्ते लेने पर प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ती है और डेंगू से बचाव सम्भव हो पाता है। इसके अलावा गिलोय के अर्क को शहद के साथ लेने पर मलेरिया में राहत मिलती है। इसके ज्वरनाशक गुण के कारण, बुखार के लिए 90% आयुर्वेदिक दवाओं में गिलोय का उपयोग किया जाता है।

डायबिटीज में राहत दिलाये –

डायबिटीज रहने की स्थिति में नियमित रुप से गिलोय का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल कम होने लगता है। ये ब्लडप्रेशर और लिपिड के लेवल को कम करता है और टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में काफी मददगार साबित होता है।

त्वचा को जवां बनाये रखे –

गिलोय में मौजूद बुढ़ापा-रोधी गुण त्वचा को जवां बनाये रखते हैं और बढ़ती उम्र के निशान जैसे झाईयां, झुर्रियां और बारीक लाइनों को कम करने के अलावा, काले धब्बे और मुहांसों को भी दूर करते हैं। ऐसे में अपनी त्वचा को सुन्दर और जवां बनाये रखने के लिए गिलोय का रस त्वचा पर लगाएं।

गठिया के इलाज में सहायक –

जोड़ों में दर्द, सूजन और गठिया से राहत पाने के लिए गिलोय का सेवन किया जाना चाहिए। गठिया के इलाज के लिए गिलोय का इस्तेमाल घी के साथ किया जाता है वहीँ रुमेटी गठिया को ठीक करने के लिए गिलोय को अदरक के साथ लिया जाता है। गिलोय में गठिया विरोधी गुण होने के कारण इसका सेवन गठिया के इलाज में काफी सहायक होता है।

अस्थमा में मददगार –

अस्थमा के इलाज में गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है जिससे काफी राहत मिलती है। नीम और आंवला के साथ बना गिलोय का मिश्रण लेने पर अस्थमा में ज़्यादा और प्रभावी रूप से राहत मिलने लगती है।

आँखों की रोशनी बढ़ाये –

गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिलाकर लेने पर आँखों से जुड़े विकार दूर होने लगते हैं और आँखों की रोशनी भी बढ़ती है।

इसके अलावा गिलोय दिल की कमजोरी को दूर करके, दिल के रोगों को भी दूर करता है और एनीमिया को दूर करने में भी काफी फायदेमंद रहता है।

गिलोय के इतने सारे फायदे जान लेने के बाद आपको भी इसका सेवन करना शुरू कर देना चाहिए लेकिन ऐसा करने से पहले गिलोय से जुड़ी ये जानकारी लेना भी बेहतर होगा-

पांच साल की उम्र से छोटे बच्चों को गिलोय नहीं दिया जाना चाहिए।

डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को डॉक्टर के परामर्श के बाद ही गिलोय का सेवन शुरू करना चाहिए।

प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सर्जरी और ऑपरेशन के बाद इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

कब्ज की समस्या रहने पर डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

ल्यूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून डिसीज होने की स्थिति में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।


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